बॉयो डीजल

इस कार्यक्रम का उद्देश्यक जटरोफा और पोंगामिया पौधरोपण को बढ़ावा देकर अनुपयोगी बंजरभूमि का उत्पाकदक प्रयोग करना है ताकि इन्हेंऔ एचएसडी में 20% मिलाया जा सके तथा साथ ही जैव-ईंधन के नवीकरणीय स्रोत का सृजन भी करना है, जिसके द्वारा आयातित पेट्रोलियम डीजल पर देश की निर्भरता को कम करना है। अब विभाग पौधरोपण कार्य का मूल्यां कन करने के लिए एक अध्ययन कराने पर विचार कर रहा है जो देश में पहले से चलाया जा रहा है ताकि विभाग कार्यक्रम के प्रदर्शन चरण को शुरू करने के बारे में स्पष्ट निष्कर्षों को मंत्रिमंडल को प्रस्तुत कर सके।

जैव-डीजल पर राष्ट्रीय मिशन : योजना आयोग द्वारा जुलाई 2002 में गठित बॉयो-ईंधन के विकास संबंधी समिति ने अप्रैल 2003 की अपनी रिपोर्ट में राष्ट्रीय बॉयो डीजल आयोग बनाने की सिफारिश की थी। ग्रामीण विकास मंत्रालय को इस मिशन के लिए नोडल मंत्रालय के रूप में विनिर्दिष्टज किया गया था। अनुवर्ती कार्रवाई के रूप में ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (टेरी) नई दिल्ली द्वारा विस्तृकत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई है और उसे योजना आयोग को प्रस्तुत किया गया है। योजना आयोग ने 23.12.05 को जैव-डीजल परियोजना को ''सैद्धांतिक अनुमोदन'' प्रदान किया है।

भू-अभिलेख विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय में राष्ट्री य बॉयो-डीजल मिशन की स्थायपना के प्रस्‍ताव को 9.10.2006 को ईएफसी की बैठक के अनुमोदन से आर्थिक कार्यों संबंधी मंत्रिमंडल समिति के समक्ष रखा गया था। सीसीईए ने केन्द्री य कृषि मंत्री की अध्योक्षता में मंत्रियों के समूह (जीओएम) को मामला संदर्भित किया था। नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनई) को जीओएम का नोडल मंत्रालय बनाया गया था। जीओएम की बैइक 24.02.09 को हुई थी और उन्होंने डीओएलआर में राष्ट्रीय बॉयो-डीजल मिशन की स्थामपना के लिए सैद्धांतिक सशर्त अनुमोदन दिया था।

जीओएम की सिफारिशों को नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा मंत्रिमंडल को प्रस्तुतत किया गया था। मंत्रिमंडल ने कार्यक्रम को ''सैद्धांतिक'' सशर्त अनुमोदन प्रदान किया था ताकि 3 लाख हेक्टेययर क्षेत्र में बॉयो डीजल का उत्पा दन करने वाले पौधे,अखाद्य तिलहनों की प्रजातियां (जटरोफा और पोंगामिया) अवक्रमित वन भूमि और बंजर भूमि पर लगाई जा सकें अर्थात् अनुमोदन देश में पहले से कराए गए पौधरोपण कार्य के मूल्यांकन के सकारत्म क फीडबैक की प्राप्ति पर आधारित है। तदनुसार,विभाग ने देश में पहले से चलाए जा रहे पौधरोपण का पता लगाने के लिए टेरी को अध्येयन का कार्य सौंपा है।