उद्देश्‍य

विभाग के मुख्‍य उद्देश्‍य हैं :-

  • एकीकृत वाटररोड प्रबंधन की प्रक्रिया के जरिए वर्षा सिंचित/अवक्रमित भूमि की उत्‍पादकता को बढ़ाना।
  • राष्‍ट्रीय भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (एनएलआरएमपी) के कार्यान्‍वयन के लिए राज्‍यों/संघ शासित क्षेत्रों को सहायता देना।
  • भूमि अर्जित अधिनियम, 1894 के प्रशासन राष्‍ट्रीय पुनर्वास और विस्‍थापित नीति 2007, पंजीकरण अधिनियम, 1908 आदि जैसे भूमि से संबंधित भू-सुधार और अन्‍य संबंधित मामले।
  • बॉयो-डीजल मिशन

  • यहां यह उल्‍लेख करना संगत होगा कि भू-सुधार और संबंधित मामले भारत के प्रधान मंत्री की अध्‍यक्षता में गठित राष्‍ट्रीय भू-सुधार परिषद के विचाराधीन हैं। इसलिए, परिषद द्वारा आवश्‍यक निर्देश देने के बाद ही सही स्‍थिति और कार्य-योजना बनाई जाएगी। पुनर्वास और विस्‍थापित नीति, भूमि अर्जन अधिनियम और पंजीकरण अधिनियम के संबंध में विभाग समय-समय पर उपयुक्‍त नीतिगत सहायता और भारत सरकार तथा राज्‍यों के विभागों और सरकारी संगठनों को मार्गदर्शन देता है। इसलिए, इस विषय पर कोई विशिष्‍ट लक्षित कार्रवाई बिंदु बिदु नहीं है।

    बॉयो-डीजल मिशन के संबंध में मंत्रिमंडल ने मिशन को ''सैदांतिक'' अनुमोदन दे दिया है बशर्तें कि प्रभाव का मूल्‍यांकन अध्‍ययन तथा उस पर सकारात्‍मक फीडबैक प्राप्‍त हो। इसलिए, प्रभाव मूल्‍यांकन अध्‍ययन अभी भी चल रहा था जिसमें नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के इस पृष्‍ठभूमि में भूमि सुधार तथा संबंधित मुद्दों तथा राष्‍ट्रीय बॉयो-डीजल मिशन के संबंध में किसी कार्य-योजना तथा इसके डिजाइन को सफल बनाना संभव नहीं होगा।